किसान बिल 2020 दोनों सदनों में पास लेकिन क्यों कर रहे है विपक्ष और देश के किसान इसका विरोध? क्या विपक्ष रच रहा है कोई बड़ा सडयंत्र? - BuzzingNews 24/7

Breaking

Wednesday, September 23, 2020

किसान बिल 2020 दोनों सदनों में पास लेकिन क्यों कर रहे है विपक्ष और देश के किसान इसका विरोध? क्या विपक्ष रच रहा है कोई बड़ा सडयंत्र?



देश में किसानों की नाराजगी और विपक्ष के राज्य सभा में हंगामे और विरोध के बावजूद भाजपा सरकार ने किसान बिल 2020 को देश के दोनों सदनों में लोक सभा और राज्य सभा में पास कराने में सक्षम रही। 

भाजपा का कहना है कि ये किसान बिल हमारे देश के किसानों को उनकी उपज में आमदनी बढ़ाने और उनके अनाज को बेचने के लिए नया मार्केट प्रदान करने के लिए लाया गया है। 

वही दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि लाये गए किसान बिल में खामियाँ है। यह किसानों के साथ धोखा है जो BJP की सरकार अपने हितैसी बड़े कारोबारियों की मद्द करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए लाई है। 

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर के किसान जो इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दिल्ली तक आ गए थे उनका कहना है कि सरकार APMC मार्किट खत्म करने के इरादे से ये नया बिल लेकर आई है। 

कृषि राज्य विषय है और अधिकांश राज्य सरकारों ने पारदर्शिता और व्यापारियों के विवेकाधिकार को समाप्त करने के लिए 1950 में APMC एक्ट लाया गया जिसका  मकसद देश में किसानों को उनकी फसल का अच्छा मूल्य मिले और उन्हें अपना अनाज बेचने कहीं और जाना न पड़े इस लिए लागू किया गया था। 

देश में कई जगहों पर APMC मार्किट है जहाँ किसान अपनी फसल एक नियमित मूल्य पर बेचते है जो कि सरकार द्वारा निर्धारित होता है। 


तो आखिर क्या है विरोध के पीछे की पूरी कहानी? 

कुछ दिनों पहले हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर के किसान जो सरकार द्वारा लाये गए नए किसान बिल को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे उन किसानों पर दिल्ली में लाठी चार्ज किया गया। जिसके विरोध में विपक्षी दलों ने BJP सरकार को घेरा और किसान बिल 2020 को किसान विरोधी बिल बताया। 

विरोध को देखते हुए BJP सहयोगी ओर अकाली दल की सांसद हर्सिमृत कौर बादल ने कैबिनेट से बिल के विरोध में इस्तीफा दे दिया। 

इससे BJP और अकाली दल के बीच विरोधाभास के स्वर उठने लगे लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। 


किसान बिल है क्या और किन नियमों को ले कर किसान कर रहे है विरोध? 

नए किसान नियमो में तीन चीजो का समावेश है

पहला नियम "आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020" है  ये कानून 1955 में बनाया गया था इसके तहत सरकार इस बात को निश्चित करती है कि किस सामान का कितना भंडार स्टोर किया जा सकता है। अब इस बिल में संसोधन कर सरकार ने ये फैसला किया है कि वह अब सिर्फ युद्ध नहीं तो किसी आपदा के समय ही भंडार का नियमन करेगी। 

दूसरा नियम "कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा विधेयक)" है जिसके तहत सरकार ने किसानों को उनकी उपज APMC मंडी के बाहर बेचने की अनुमति दी है। जिससे उन्हें अपना अनाज बेचने के लिए सिर्फ APMC मंडियों पर ही निर्भर नहीं रहना होगा और कोई भी किसान से उनकी उपज खरीद सकता है। 

तीसरा बिल है "मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा बिल ये एक तरीके का कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग होगा जिसके तहत किसान फसल बोते वक़्त ही खरीदार से समझौता कर सकते है कि वो अपनी उपज किस दाम पर बेचेंगे। 

ये कानून सरकार ने अध्यादेश के जरिये जून के महीने में लागू किया था क्योंकि, जैसे ही संसद का मानसून सत्र शुरु हुआ भाजपा सरकार ने किसानों के हित को देखते हुए लोक सभा और राज्य सभा के सामने "किसान बिल 2020" रखा जो लोक सभा मे पास हो गया।फिर ये बिल आया राज्य सभा मे जिसके विरोध में विपक्षी दलों ने संसद में खूब हंगामा किया। राज्य सभा के चेयरमैन के सामने रूल बुक पहाड़ी गयी और साथ ही साथ उनका माइक भी तोड़ा गया। 


ये सब देख भाजपा ने विपक्ष पे निशाना साधते हुए कहा कि ये सदन की गरिमा के खिलाफ है और ये सदन की अवमानना है। जिसके बाद सदन की बैठक को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया गया। 

अगले दिन हंगामा करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उन्हें संसद से अगली सभी बैठकों से निलंबित कर दिया गया जिसमे कांग्रेस और TMC के नेता शामिल थे। कुल 8 सांसदो को निलंबित किया गया। नेताओ ने सदन  के सामने रात भर बैठ हड़ताल की और उनको संसद में वापस जगह देने की मांग की। 

इसके बावजूद भी सरकार किसान बिल 2020 संसद में पास कराने में सफल रही। 

विरोध किसान बिल का नही बल्कि किसान बिल में APMC मार्किट के अलावा जो सरकार ने बाकी व्यापारियों को किसानों से अनाज खरीदने की मंजूरी दी है उस पर है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार APMC मार्किट खत्म करना चाहती है और उद्योगपतियों को बढ़ावा देना चाहती है जो किसान से अपने मनमर्जी के हिसाब से अनाज खरीदेंगे। 

जिसका जवाब देते हुए भाजपा सरकार ने कहा कि इरादा APMC मार्किट को खत्म करना नही है बल्कि किसानों को और सुविधा मुहैया कराना इस बिल का एक मात्र लक्ष्य है। 

इसके बीच बयान बाजी का भी सिलसिला खूब चल रहा है। 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का कहना है कि ये बिल देश के किसानों के लिए काला बिल है। 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि ये बिल किसानों की भलाई के लिए है और विपक्ष किसानों को बरगलाने की कोशिश कर रही है अपने स्वार्थ के लिए। 

अब देखना है की सरकार द्वारा लाया गया ये किसान बिल आने वाले सालों में कितना कारगार साबित होगा किसानों के लिए।

7 comments:

Pages